JAINISM

HAVE YOU EVER THOUGHT ? Who Are You ? A Doctor ? An Engineer ? A Businessman ? A Leader ? A Teacher ? A Husband ? A Wife ? A Son ? A Daughter are you one, or so many ? these are temporary roles of life who are you playing all these roles ? think again ...... who are you in reality ? A body ? A intellect ? A mind ? A breath ? you are interpreting the world through these mediums then who are you seeing through these mediums. THINK AGAIN & AGAIN.

Wednesday, 2 April 2014

›
भोगभूमिज मनुष्य - हैमवत और हैरण्यवत क्षेत्र ३६८४,४/१९ योजन विस्तृत है। उनमें सुषमा-दुषमा काल के सदृश जघन्य भोगभूमि की व्यवस्था है। विशेषता ...

›
‘अढाई द्वीप और दो समुद्रों के अन्तर्गत १५ कर्मभूमियां हैं।’ दससु भरहेरावएसु पंचसु महाविदेहेसु४। ५ भरत, ५ ऐरावत और ५ महाविदेह की १५ कर्मभूमि ...

›
पुष्करार्ध द्वीप पुष्करवर द्वीप का विस्तार सोलह लाख योजन है। यह द्वीप चारों तरफ से कालोदधि समुद्र को घेरे हुए है। इस द्वीप के ठीक बीच में म...

›
धातकीखण्ड मध्यलोक में सबसे बीच में थाली के समान गोल आकार वाला जम्बूद्वीप है। यह एक लाख योजन विस्तृत है। इसे चारों तरफ से घेरकर दो लाख विस्त...

›
लवण समुद्र लवण समुद्र जम्बूद्वीप को चारों ओर से घेरे हुए खाई के सदृश गोल है, इसका विस्तार दो लाख योजन प्रमाण है। एक नाव के ऊपर अधोमुखी दूसर...

›
मनुष्यलोक के द्वीप समुद्र - इस ४५ लाख योजन प्रमाण मनुष्यलोक के बीचोंबीच में जम्बूद्वीप है जो कि एक लाख योजन व्यास वाला गोलाकार है। इसको चार...

›
देवों के भेद देवों के चार भेद हैं-भवनवासी, व्यंतरवासी, ज्योतिर्वासी और कल्पवासी। भवनवासी देव भवनवासी देवों के स्थान रत्नप्रभा पृथ्वी के ३...
‹
›
Home
View web version

About Me

Jain dharam ka knowledge
View my complete profile
Powered by Blogger.